बिना पुलिस 10 सेकेंड में ढूंढ सकेंगे चोरी हुआ मोबाइल- ये चोरी का तो नहीं? जानिए- तरीका

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बिना पुलिस 10 सेकेंड में ढूंढ सकेंगे चोरी हुआ मोबाइल- ये चोरी का तो नहीं? जानिए- तरीका

बिना पुलिस 10 सेकेंड में ढूंढ सकेंगे चोरी हुआ मोबाइल: महंगा फोन खरीदते समय भी पता चल जाएगा- ये चोरी का तो नहीं? जानिए- तरीका

अब अगर आपका मोबाइल चोरी हो गया है या फिर कहीं खो गया है तो आपको पुलिस के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। आप खुद ही सिर्फ 10 सेकेंड में पता लगा सकेंगे कि आपका मोबाइल चोरी होने के बाद कौन सी लोकेशन पर दोबारा एक्टिव हुआ है।

साथ ही अगर आप सेकेंड हैंड फोन खरीदने जा रहे हैं और यह पता लगाना चाहते हैं कि कि ये फोन चोरी का तो नहीं…तो इसकी भी फिक्र करने की आपको जरूरत नहीं है। आप इसका भी सिर्फ 10 से 15 सेकेंड में पता लगा सकते हैं।

यानी जो काम पुलिस कर सकती है, वो ही काम आप एक क्लिक पर घर बैठे कर सकते हैं। लेकिन, आपके मन में अब एक सवाल फिर से उठ रहा होगा कि आखिर ये कैसे संभव है?

तो आइए जानते हैं इसका क्या प्रोसेस है, आपको कैसे और क्या करना होगा?

दरअसल, आपके गुम या चोरी हुए मोबाइल को ढूंढने में सरकार आपकी मदद करने वाली है। केंद्र सरकार इसी सप्ताह से पूरे देश में मोबाइल ट्रैकिंग सिस्टम को लागू करने वाली है। इस सिस्टम के जरिए आप आईफोन से लेकर एंड्रॉयड फोन को ट्रैक कर सकेंगे।

इसके लिए आपको सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (CEIR) दूरसंचार विभाग की वेबसाइट https://www.ceir.gov.in पर जाना होगा।

इस वेबसाइट के जरिए आप अपने मोबाइल को सीधे ब्लॉक कर सकते हैं और फोन दोबारा मिल जाता है तो उसे अनब्लॉक भी कर सकते हैं। इतना ही नहीं आप अपने मोबाइल को ट्रैक कर पुलिस को भी बता सकते हैं कि आपका फोन कौन से शहर में एक्टिव दिख रहा है।

फोन को ट्रैक करने से पहले आपको जो प्रोसेस अपनाना है, उसमें करीब 24 घंटे का समय लगेगा। जब आपका ये प्रोसेस पूरा हो जाएगा तो चोरी करने वाला आपका फोन यूज भी नहीं कर पाएगा।

यदि वह उसमें गलती से भी सिम डाल देता है तो उसकी लोकेशन जरूर ट्रैक हो जाएगी और आपको पता चल जाएगा कि आपका फोन कहां पर यूज हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि इसी वेबसाइट के जरिए अब तक करीब ढाई लाख मोबाइल सरकार उनके मालिकों तक पहुंचा चुकी है।

वर्तमान में ये प्रोजेक्ट दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक सहित पूर्वोत्तर में चल रहा है और, अब ये सक्सेस होने के बाद इसे पूरे देश में लॉन्च करने की तैयार की जा रही है।

पहले जानते हैं, क्या है CEIR

सीईआईआर खोए या चोरी हुए मोबाइल का पता लगाने के लिए दूरसंचार विभाग का पोर्टल है। यह सभी दूरसंचार ऑपरेटरों के नेटवर्क में ऐसे मोबाइल को ब्लॉक करने की सुविधा भी देता है ताकि देश में इनका उपयोग नहीं किया जा सके।

अब पढ़ें- आपका मोबाइल खो गया या चोरी हो गया तो क्या करना है आपको

सबसे पहले आपको पुलिस को एक FIR देनी होगी और इसकी एक कॉपी अपने पास रखनी है
अपने मोबाइल ऑपरेटर जैसे- एयरटेल, जियो, वोडाफोन, बीएसएनएल आदि से खोए हुए नंबर के लिए एक डुप्लीकेट सिम कार्ड लेना होगा।
ये इसलिए जरूरी है क्योंकि आपको अपने IMEI नंबर को ब्लॉक करवाने के लिए, ओटीपी भेजा जाएगा।
ट्राई के नियमानुसार जारी की गई नई सिम पर SMS सर्विस 24 घंटे में एक्टिव हो जाएगी।
जब आप अपनी शिकायत दर्ज करेंगे तो इस तरह का विंडो ओपन होगा। इसमें आपको मोबाइल और पर्सनल सारी डिटेल शेयर करनी होगी।
जब आप अपनी शिकायत दर्ज करेंगे तो इस तरह का विंडो ओपन होगा। इसमें आपको मोबाइल और पर्सनल सारी डिटेल शेयर करनी होगी।
इसके बाद आपको इन स्टेप्स को फॉलो करना है…

आपको सबसे पहले https://www.ceir.gov.in/ इस वेबसाइट पर जाना होगा, जहां आपको तीन ऑप्शन मिलेंगे।
ये वेबसाइट इंग्लिश और हिंदी दोनों भाषाओं का ऑप्शन देती है। आप अपनी सुविधा अनुसार लैंग्वेज ऑप्शन सिलेक्ट कर सकते हैं।
जब आप लैंग्वेज को सिलेक्ट कर आगे बढेंगे तो ये ऑप्शन मिलेंगे– ब्लॉक स्टोलन या ब्लॉक मोबाइल यानी अपना चोरी या गुम हुआ फोन ब्लॉक करेंगे।
अनब्लाॅक फाउंड मोबाइल यानी जो मोबाइल मिल गया है उसे अनब्लॉक करें।
चेक रिक्वेस्ट स्टेटस यानी जिसके लिए आपने रिक्वेस्ट भेजी है, उसका क्या स्टेटस या फिर किस प्राेसेस पर है।
इन ऑप्शन को जब आप चुनते हैं तो क्या होगा

आपको पहला ऑप्शन ‘ब्लॉक स्टोलन या ब्लॉक मोबाइल’ चुनना है, चुनते ही एक फॉर्म खुलेगा।
इसमें चोरी या गुम हुए मोबाइल के नंबर, IMEI नंबर, ऑपरेटर का नाम, मोबाइल मॉडल आदि लिखना है।
जब मोबाइल खरीदा था उसका बिल आपको अटैच करना होगा, यदि आपका फोन दो सिम वाला है और दोनों सिम आप यूज कर रहे हैं, तो दोनों नंबर और दोनों IMEI नंबर शेयर करने होंगे।
मोबाइल खोने से संबंधित जानकारी, जैसे तारीख, शहर, जिला, पुलिस स्टेशन का नाम, कंप्लेंट नंबर और FIR की कॉपी अटैच करनी होगी।
इसके बाद अपना नाम, पता सहित अपनी व्यक्तिगत जानकारी भरें और ई-मेल आईडी आदि जानकारी शेयर करनी होगी।
कैप्चा लिखने के बाद, मोबाइल नंबर लिखे, जिस पर OTP आएगा।
मेरी जानकारी सही है, गलत जानकारी देने पर मैं उत्तरदायी हूं…सिलेक्ट करें और फॉर्म सब्मिट कर दें।
फॉर्म सब्मिट होते ही आपको एक रिक्वेस्ट आईडी दी जाएगी। इस रिक्वेस्ट आईडी के जरिए आप अपनी कंप्लेंट की स्थिति देख सकते हैं, इसी रिक्वेस्ट आईडी से आपका फोन भी अनब्लॉक होगा।
जरूरी बात यह है कि किसी के द्वारा आपके फोन में जैसे ही सिम डाली जाएगी, तो इस रिक्वेस्ट आईडी के जरिए ही उसकी लोकेशन की जानकारी मिल जाएगी।
अगले सप्ताह से देशभर में ये सर्विस शुरू हो जाएगी। जब आप अपनी शिकायत के जरिए जैसे ही रिक्वेस्ट आईडी जनरेट करते हैं और चेक रिक्वेस्ट स्टेटस ऑप्शन में डालते हैं, तो किसी के द्वारा कहीं भी जब सिम डाली जाती है, आप लोकेशन भी ट्रेस कर सकते हैं। लेकिन, इसके लिए आपको सबसे पहले एफआईआर दर्ज करानी होगी।
अगले सप्ताह से देशभर में ये सर्विस शुरू हो जाएगी। जब आप अपनी शिकायत के जरिए जैसे ही रिक्वेस्ट आईडी जनरेट करते हैं और चेक रिक्वेस्ट स्टेटस ऑप्शन में डालते हैं, तो किसी के द्वारा कहीं भी जब सिम डाली जाती है, आप लोकेशन भी ट्रेस कर सकते हैं। लेकिन, इसके लिए आपको सबसे पहले एफआईआर दर्ज करानी होगी।
रिक्वेस्ट आईडी से अपनी शिकायत की स्थिति और फोन की लोकेशन यों पता लगाएं

इसके लिए आपको इसी वैब साइट पर जाकर तीसरे ऑप्शन चैक रिक्वेस्ट स्टेटस (अनुरोध की स्थिति की जांच करें) पर क्लिक करना होगा।
शिकायत स्टेटस फॉर्म में शिकायत आईडी और मोबाइल नंबर भरें।
6 अंकों का ओटीपी नंबर भेजा जाएगा। प्राप्त ओटीपी भर दें। इसके बाद फॉर्म सबमिट करें।
अब शिकायत का विवरण आपके पास उपलब्ध होगा।
जब आप अपनी शिकायत के जरिए जैसे ही रिक्वेस्ट आईडी जनरेट करते हैं और इसे चैक रिक्वेस्ट स्टेटस ऑप्शन में डालते हैं, तो अगली विंडो खुलेगी। इसके जरिए चोरी या गुम हुए मोबाइल में किसी के द्वारा कहीं भी जब सिम डाली जाती है, तो आप लोकेशन भी ट्रेस कर सकते हैं।
वेरिफिकेशन के बाद होगा ब्लॉक या अनब्लॉक

इस वेबसाइट में सिक्योरिटी का पूरा ध्यान रखा गया है। मतलब कोई दूसरा व्यक्ति आपका फोन ब्लॉक न करवा दें इसके लिए पूरा सिस्टम ट्रैक किया जाता है। जब आप इस वेबसाइट के जरिए सिम ब्लॉक या अनब्लॉक की रिक्वेस्ट करेंगे तो पुलिस थाने से वैरिफिकेशन होगा।

साइट पर रिक्वेस्ट डालने के बाद संबंधित थाने को इन्फॉर्मेशन भेजी जाएगी। पुलिस अपने स्तर पर जानकारी जुटाकर पता लगाएगी कि क्या शिकायत करने वाले का ही फोन गुम है। पुलिस से सारी अपडेट मिलने के बाद आपके फोन ब्लॉक और अनब्लॉक की रिक्वेस्ट आगे एक्सेस हो पाएगी।

यदि पुलिस फॉर्म सब्मिट कर दे तो आपको ये मैसेज मिलेगा

ये प्रोसेस संबंधित थाने से भी हो सकता है। लेकिन, इसका पता आपको कैसे चलेगा ये भी बताते हैं।

FIR दर्ज होने के बाद यदि पुलिस ब्लॉक की रिक्वेस्ट डाल देती है और आप दोबारा ब्लॉक के लिए रिक्वेस्ट डालते हैं तो आपको ये मैसेज मिलेगा…”Request already exist for IMEI *** and mobile number *** with FirNo = *** on *** by State police.”। इसका मतलब है कि आपकी रिक्वेस्ट को पहले से राजस्थान पुलिस ने साइट पर डाल दी है और वेबसाइट के सिस्टम में आपकी शिकायत पहले से दर्ज है।

अब पढ़ें… यदि आपका फोन मिल गया है तो उसे कैसे अनब्लॉक करें

यूजर को अपने फोन के IMEI को तभी अनब्लॉक की रिक्वेस्ट करनी है जब फोन मिल जाए और उस तक पहुंच जााए।
यदि पुलिस ढूंढ लेगी तो इसमें कोई परेशानी नहीं, लेकिन चोरी हुआ फोन आपको मिल गया हो तो इसकी जानकारी पुलिस को देनी होगी।
और, आपको अनब्लॉक के लिए ये स्टेप अपनाने होंगे…

इसके बाद आपको दूसरे ऑप्शन अनब्लॉक फाउंड मोबाइल यानी मिले हुए फोन को अनब्लॉक करना है।
जैसे ही आप इसे सिलेक्ट करेंगे, आपके सामने एक नया फॉर्म खुलेगा, इसमें आपको ब्लॉक रिक्वेस्ट के दौरान मिले कंप्लेंट आईडी शेयर करनी होगी।
इसके साथ ही आपको मोबाइल नंबर और अनब्लॉक का कारण भी डालना होगा।
इसे सब्मिट करने के बाद कैप्चा आएगा और इसके बाद OTP।
OTP की जानकारी देने के बाद आपको फॉर्म सब्मिट करना होगा, और 24 घंटे में आपका फोन अनब्लॉक हो जाएगा।
और, ये प्रोसेस आप पुलिस से करवाना चाहते हैं तो पुलिस थाने जाकर आपको इसकी जानकारी देनी होगी।

और, अब सबसे जरूरी, बेफिक्र होकर खरीदें सेकेंड हैंड मोबाइल, एक क्लिक पर पता लगा पाएंगे ये चोरी का तो नहीं

इस वेबसाइट के जरिए आप ये भी पता लगा सकते हैं कि आपका खरीदा हुआ सेकेंड हैंड फोन चोरी या क्लोनिंग का तो नहीं।
इस वेबसाइट के जरिए सेकेंड हैंड मोबाइल और IMEI नंबर क्लोनिंग की जानकारी भी मिल जाएगी।
वेबसाइट पर नो योर मोबाइल (KYM) सर्विस भी मिल रही है, इसके जरिए मोबाइल डिवाइस की वैलिडिटी भी चेक की जा सकती है।
मोबाइल बॉक्स और बिल पर IMEI नंबर लिखा होता है। आप चाहें तो *#06# डायल करके इसे अपने फोन में देख सकते हैं।
वेबसाइट पर यदि जानकारी भरते हैं, तो वह डिवाइस को ब्लैक लिस्टेड, डुप्लीकेट या पहले से इस्तेमाल में दिखाता है तो ऐसे फोन खरीदने से बचें।
इसलिए पड़ी जरूरत, क्योंकि 4 प्रतिशत लोग ही देते हैं पुलिस को शिकायत
आईटी एक्सपर्ट आयुष भारद्वाज ने बताया कि राजस्थान हो या कोई भी राज्य सभी जानते हैं कि किसी प्रभावशाली व्यक्ति का मोबाइल चोरी या गुम हो जाए तो पुलिस को दबाव में FIR दर्ज करनी पड़ती है। लेकिन, यदि आम आदमी का फोन चोरी जाए तो पुलिस तब भी उसकी केवल गुमशुदगी दर्ज करती है।

एक स्टडी के अनुसार देश में केवल 4 प्रतिशत लोग ही मोबाइल फोन खोने और चोरी होने की सूचना पुलिस को देते हैं। इसका कारण बताया गया है कि पुलिस शिकायत लेने में परेशानी खड़ी करती है। ऐसे में चोरी भी हो तो भी गुमशुदगी दर्ज करवाई जाती है। स्टडी में लोगों ने ये भी माना है कि मोबाइल खोने की FIR दर्ज करवाना बड़ी ही परेशानी वाला काम है।

सरकार ने क्यों जरूरी समझा इस प्रोजेक्ट को

एक्सपर्ट के अनुसार सरकार का उद्देश्य है कि वे नकली मोबाइल फोन के बाजार पर अंकुश लगाने के साथ ही देश में मोबाइल फोन चोरी की घटना को कम करना चाहता है।

अब तक केवल इस पोर्टल पर फोन ब्लॉक या अनब्लॉक के लिए पहले केवल पुलिस ही फॉर्म भर सकती थी और फोन ट्रैक कर सकती थी। लेकिन, अब पुलिस के साथ आमजन भी फॉर्म भर सकते हैं।

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